नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स एसोसिएशन (आई) के नेतृत्व में एलपीजी वितरकों ने विभिन्न मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। आंदोलन के तहत 21 सितंबर को राष्ट्रपति के नाम जिला कलेक्टर के माध्यम से ज्ञापन सौंपा जाएगा। एसोसिएशन के अनुसार आंदोलन का पहला चरण 1 सितंबर से काली पट्टी बांधकर विरोध दर्ज कराने के साथ शुरू किया गया है।एसोसिएशन ने आंदोलन के आगामी कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 5 अक्टूबर को देशभर में प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की जाएगी।इसके बाद 6 अक्टूबर को ‘नो मनी-नो इंडेंट’अभियान चलाया जाएगा। इस दौरान वितरकों द्वारा राशि जमा नहीं करने और लोड नहीं लेने का निर्णय लिया गया है। वहीं 26 अक्टूबर को नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना प्रदर्शन किया जाएगा। इसके बाद मांगों का निराकरण नहीं होने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी गई है।एलपीजी वितरकों ने प्रशासनिक शुल्क एवं होम डिलीवरी प्रभार में ‘डी नोवो स्टडी’ की अनुशंसा के अनुरूप तत्काल 75 रुपए की अंतरिम वृद्धि करने की मांग की है। इसके अलावा ई-केवाईसी की प्रत्येक प्रक्रिया के लिए सार्वजनिक तेल कंपनियों से वितरकों को 236 रुपए भुगतान किए जाने की मांग रखी गई है।ज्ञापन में सार्वजनिक तेल कंपनियों से एलपीजी प्रदाय एवं वितरण विनियमन आदेश की संबंधित धाराओं का पालन सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही एनएफआर/एआरबी उत्पादों की बिक्री के लिए वितरकों पर दबाव नहीं बनाने की मांग उठाई गई।वितरकों ने गैर-घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की बिक्री का लक्ष्य नहीं देने, इंडेंट में जबरन बदलाव नहीं करने तथाएफआईएल की बिक्री को लेकर कार्रवाई की मांग भी रखी है। इसके साथ ही पीएनजी की अनिवार्यता समाप्त करने और नए घरेलू श्रेणी के गैस कनेक्शन फिर से शुरू करने की मांग की गई है।ज्ञापन में विक्रय अधिकारियों द्वारा एमडीजी के नाम पर वितरकों को परेशान किए जाने का आरोप लगाते हुए इस प्रथा को बंद करने की मांग भी की गई है।एलपीजी वितरकों ने राष्ट्रपति से उनकी मांगों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव को निर्देशित करने तथा होम डिलीवरी प्रभार एवं प्रशासनिक शुल्क में तत्काल 75 रुपए की अंतरिम वृद्धि किए जाने की मांग की है।