नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। राधाष्टमी के पावन अवसर पर गांधी सागर अभयारण्य को एक और मादा चीता की सौगात मिली। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रविवार को गांधी सागर अभयारण्य में मादा चीता सीसीबी-2 को वन क्षेत्र में विमुक्त किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मादा चीता का नामकरण ‘राधा’ करते हुए प्रदेशवासियों को राधाष्टमी की शुभकामनाएं दीं।
मादा चीता राधा के गांधी सागर पहुंचने के साथ ही अभयारण्य में चीतों की संख्या बढ़कर चार हो गई है। अब यहां दो नर चीते प्रभाष और पावक तथा दो मादा चीते धीरा और राधा मौजूद हैं।
चीता पुनर्स्थापना परियोजना के चार वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में गरोठ विधायक चंदर सिंह सिसोदिया, मनासा विधायक अनिरुद्ध माधव मारू, प्रमुख सचिव मध्यप्रदेश शासन राघवेंद्र सिंह, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) समिता राजोरा सहित वन विभाग के अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
गांधी सागर बना चीता संरक्षण का दूसरा प्रमुख केंद्र
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता निरंतर आगे बढ़ रहा है। गांधी सागर में चीतों की बढ़ती संख्या वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रदेश की प्रतिबद्धता और वन विभाग के प्रयासों को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश वन्यजीव विविधता से समृद्ध प्रदेश है और टाइगर स्टेट के रूप में अपनी पहचान के साथ वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गांधी सागर अभयारण्य में चीतों की मौजूदगी से क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलेगा। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर और पर्यटन आधारित गतिविधियों के विस्तार की संभावनाएं विकसित होंगी।
नई मादा चीता से प्रजनन की संभावनाओं को भी बल
मादा चीता राधा को गांधी सागर अभयारण्य में बसाया जाना कूनो के बाद मध्यप्रदेश में चीता संरक्षण के दूसरे प्रमुख आवास के रूप में गांधी सागर के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। वन विभाग की टीम राधा सहित अभयारण्य में मौजूद सभी चीतों के स्वास्थ्य, व्यवहार और नए वातावरण में अनुकूलन की लगातार निगरानी करेगी।
नई मादा चीता के आने से गांधी सागर में चीता संरक्षण के साथ भविष्य में प्रजनन की संभावनाओं को भी बल मिलेगा। गांधी सागर को प्रोजेक्ट चीता के विस्तार के लिए विकसित किए जा रहे प्रमुख आवासों में शामिल किया जा रहा है।
‘सेकंड होम ऑफ चीता’ बुकलेट का विमोचन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वन विभाग द्वारा प्रकाशित ‘सेकंड होम ऑफ चीता-गांधी सागर वाइल्डलाइफ सैंक्चुअरी’ बुकलेट का विमोचन भी किया। बुकलेट में गांधी सागर अभयारण्य में चीता संरक्षण, उनके अनुकूलन और क्षेत्र में विकसित की जा रही व्यवस्थाओं से संबंधित जानकारी संकलित की गई है।
राधाष्टमी पर गांधी सागर में मादा चीता राधा के आगमन के साथ अब अभयारण्य में दो नर और दो मादा सहित कुल चार चीते हो गए हैं। इसे मध्यप्रदेश में प्रोजेक्ट चीता के विस्तार और गांधी सागर को चीता संरक्षण के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।