नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। अफीम खेती नीति 2026-27 को देश और किसान हितैषी बनाने की मांग को लेकर अफीम उत्पादक किसानों ने शुक्रवार को कलेक्टर प्रतिनिधि को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन प्रधानमंत्री,केंद्रीय वित्त मंत्री,वित्त राज्यमंत्री (राजस्व),मुख्यमंत्री मध्यप्रदेश तथा नारकोटिक्स विभाग के नाम दिया गया। किसानों ने अफीम का मूल्य अंतरराष्ट्रीय बाजार के अनुरूप 1 लाख रुपए प्रति किलोग्राम किए जाने सहित अफीम खेती से जुड़े किसानों के हित में कई मांगें रखीं।ज्ञापन में किसानों ने कहा कि राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के अफीम उत्पादक किसान एवं किसान पुत्र वर्ष 2008 से लगातार अफीम खेती से जुड़े अधिकारों और नीतियों में सुधार की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। किसानों ने मांग की है कि वर्ष 1990 से काटे गए सभी अफीम पट्टे लूनी-चीरनी पद्धति के आधार पर बहाल किए जाएं,ताकि लंबे समय से अफीम खेती का इंतजार कर रहे किसानों को अवसर मिल सके।किसानों ने मार्फिन की मात्रा प्रकृति पर निर्भर होने का हवाला देते हुए 3.0 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर मार्फिन को आधार बनाकर अफीम पट्टे देने, राजस्व रिकॉर्ड के अनुरूप परिवार के सभी पात्र किसान भाइयों के नाम नामांतरण करने तथा धारा 8/29 को हटाने की मांग की। साथ ही डोडा-चूरा को एनडीपीएस अधिनियम से पृथक करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल है।ज्ञापन में किसानों ने सीपीएस पद्धति को पूरी तरह समाप्त कर परंपरागत लूनी-चीरनी पद्धति से अफीम खेती के पट्टे जारी करने और किसानों की संख्या बढ़ाने की मांग रखी। डोडा-चूरा के लिए सरकार द्वारा खरीद या ठेका प्रणाली लागू कर 2 हजार रुपए प्रति किलोग्राम की दर से किसानों से खरीद करने तथा उसके निस्तारण अथवा आयुर्वेदिक दवाओं के निर्माण में उपयोग की मांग भी की गई।किसानों ने वर्ष 2015 से 2026 तक नारकोटिक्स विभाग की उच्चस्तरीय सीबीआई जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि सरकार और विभाग को किसानों की शिकायतें गलत लगती हैं तो जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए। ज्ञापन में किसानों ने कहा कि अफीम खेती नीति में किसी भी प्रकार का धोखा होने पर उन्हें आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी जिम्मेदारी सरकार, प्रशासन और नारकोटिक्स विभाग की होगी।ज्ञापन में 24 नवंबर 2013 को चित्तौड़गढ़ में किसानों को दिए गए आश्वासन का उल्लेख करते हुए परंपरागत अफीम खेती के पट्टे जारी कर किसानों के साथ न्याय करने की मांग भी की गई। किसानों ने अफीम को औषधीय उत्पाद बताते हुए अफीम खेती को किसानों के लिए राहतकारी बनाने तथा नीति 2026-27 में उनकी मांगों को शामिल करने की मांग की।