नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। नेत्रदान और देहदान की नगरी के रूप में पहचान बना चुके नीमच में मानव सेवा की एक और प्रेरणादायक मिसाल सामने आई है। नीमच लॉयंस क्लब को 58 वां देहदान प्राप्त हुआ है। बघाना निवासी राकेश पिता कन्हैयालाल के निधन के बाद उनके परिजनों ने पार्थिव शरीर का देहदान करने का निर्णय लिया। इसके बाद पार्थिव शरीर को अध्ययन एवं चिकित्सा प्रशिक्षण के लिए मेडिकल कॉलेज को सौंपा गया।देहदान के माध्यम से राकेश कादेडन का शरीर अब चिकित्सा शिक्षा के विद्यार्थियों के लिए अध्ययन का माध्यम बनेगा। मेडिकल कॉलेज के विद्यार्थियों को शरीर रचना विज्ञान के अध्ययन और व्यावहारिक प्रशिक्षण में इससे महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी। इस पुनीत कार्य के लिए मेडिकल कॉलेज के डीन ने लॉयंस क्लब तथा दिवंगत के परिजनों के प्रति आभार व्यक्त किया।सागर मंथन दिवंगत राकेश कादेडन के पार्थिव शरीर को प्रशासन की ओर से गार्ड ऑफ ऑनर देकर सम्मानित किया गया। इस दौरान मेडिकल कालेज दिन डॉ आदित्य बैराड़,एसडीएम पराग जैन सहित लॉयंस क्लब के सुनील शर्मा,चंद्रेश एरन,अनिल गोयल, मेडिकल कॉलेज के चिकित्सक,लॉयंस क्लब के पदाधिकारी तथा देहदानी के परिजन मौजूद रहे।

*मृत्यु के बाद भी समाज के काम आया शरीर*

देहदान का निर्णय केवल एक परिवार का भावनात्मक त्याग नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के चिकित्सा विद्यार्थियों और समाज के लिए अमूल्य योगदान है। राकेश कादेडन के परिजनों द्वारा लिया गया यह निर्णय इस बात की प्रेरणा देता है कि मृत्यु के बाद भी मानव शरीर चिकित्सा शिक्षा और मानव सेवा के काम आ सकता है। नीमच में लगातार सामने आ रहे देहदान और नेत्रदान के उदाहरण शहर की सेवा भावना और सामाजिक जागरूकता को भी दर्शाते हैं।