नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। शासन की ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना लागू होने से पहले ही विरोध के घेरे में नजर आ रही है। पंजीयन विलेख में पटवारी का नाम निष्पादक के रूप में शामिल किए जाने के विरोध में मंगलवार को जिलेभर के पटवारी एकजुट हुए और प्रदर्शन किया। पटवारी बालाजी मंदिर पर एकत्रित हुए, जहां से रैली के रूप में कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।पटवारियों ने योजना में उन्हें पंजीयन प्रक्रिया का हिस्सा बनाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि शासन नागरिकों को जमीन का स्वामित्व देने की प्रक्रिया शुरू कर रहा है,लेकिन पंजीयन दस्तावेज में पटवारी को निष्पादक के रूप में शामिल करने से भविष्य में कानूनी विवाद और व्यक्तिगत जवाबदेही की स्थिति बन सकती है।पटवारियों का कहना है कि जब जमीन का स्वामित्व भूमिस्वामी और शासन के बीच दस्तावेजी प्रक्रिया का विषय है,तो पटवारी को निष्पादक बनाकर उसकी व्यक्तिगत जवाबदेही तय करना उचित नहीं है।भविष्य में स्वामित्व से जुड़े विवाद सामने आने पर पटवारियों को मुकदमों में पक्षकार या जिम्मेदार बनाए जाने की आशंका है।उन्होंने बताया कि आबादी भूमि के मामलों में केवल नक्शा और खसरा ही पर्याप्त आधार नहीं होते। वास्तविक कब्जा, वारिस, सह-स्वामित्व, चतुस्सीमा, पुराने दावे और न्यायालय में लंबित विवाद जैसे कई पहलू भविष्य में स्वामित्व विवाद का कारण बन सकते हैं। ऐसे मामलों में पंजीयन दस्तावेज पर पटवारी का नाम निष्पादक के रूप में दर्ज होने से उनकी व्यक्तिगत जवाबदेही बढ़ सकती है।पटवारियों ने कलेक्टर के माध्यम से शासन से मांग की है कि ‘स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन-2026’ योजना में पटवारियों को निष्पादक के रूप में शामिल नहीं किया जाए तथा उनकी आपत्तियों का निराकरण किया जाए।