नीमच। महेंद्र उपाध्याय। देश की सीमाओं पर ड्यूटी निभाने वाले सीआरपीएफ के सेवानिवृत्त पेंशनर अब अपने आशियाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वर्ष 2007 से आवासीय भूखंड आवंटन की मांग कर रहे सीआरपीएफ पेंशनरों का 19 साल का इंतजार अब आक्रोश में बदलता नजर आ रहा है। सोमवार को नगरपालिका के विशेष सम्मेलन से पहले पेंशनर संघ के सदस्य एकत्र हुए और अपने लिए आवासीय भूखंड उपलब्ध कराने की मांग उठाई।संघ के परमजीत सिंह फौजी ने सागर मंथन को बताया कि कई सेवानिवृत्त जवान और विधवाएं आज भी किराये के मकानों में रहने को मजबूर हैं। सीमित पेंशन में किराये का खर्च उठाना उनके लिए मुश्किल हो रहा है। संघ की मांग है कि पेंशनरों के लिए अलग से आवासीय कॉलोनी विकसित की जाए अथवा नगरपालिका की उपलब्ध भूमि में से 50 प्रतिशत भूखंड पेंशनरों के लिए आरक्षित किए जाएं।पेंशनरों ने सागर मंथन से कहा  कि भूखंड आवंटन की मांग को लेकर कलेक्टर, सीआरपीएफ के वरिष्ठ अधिकारियों और शासन स्तर तक कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं,लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला। उनका आरोप है कि शहर में विभिन्न योजनाओं के लिए जमीन उपलब्ध कराई जा रही है,लेकिन वर्षों से अपने आशियाने की आस लगाए बैठे सेवानिवृत्त जवानों के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराई जा रही।भूखंड आवंटन की मांग को लेकर पेंशनरों और सीएमओ दुर्गा बामनिया के बीच तीखी बहस भी हुई। इसके बाद पेंशनर नगरपालिका कार्यालय पहुंचे और नपाध्यक्ष स्वाति चोपड़ा से मुलाकात कर अपनी मांगों एवं समस्याओं से अवगत कराया।परमजीत सिंह फौजी ने सागर मंथन से कहा कि देश की सीमा पर सेवा करने वाले जवान अब अपने हक के लिए नगरपालिका के सामने खड़े होने को मजबूर हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार को आवेदन सौंपने के साथ नगरपालिका का घेराव किया जाएगा। मांग पर सुनवाई नहीं होने की स्थिति में पेंशनर संघ ने चरणबद्ध आंदोलन शुरू करने की चेतावनी दी है।