नीमच।महेन्द्र उपाध्याय।राष्ट्रीय गौ रक्षा दल मध्य प्रदेश एवं गो पुत्र सेवा समिति के संयुक्त तत्वावधान में रविवार को सात माता मंदिर परिसर में गोवंश संरक्षण को लेकर बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिलेभर के गौ सेवक शामिल हुए। इस दौरान गोवंश की स्थिति, गोशालाओं की व्यवस्थाओं, गोचर भूमि से अतिक्रमण हटाने सहित विभिन्न मुद्दों पर चर्चा कर आगामी रणनीति तय की गई।राष्ट्रीय गौ रक्षा दल के सदस्य महेंद्र सिंह राठौड़ ने बताया कि संगठन का मुख्य उद्देश्य गोमाता के संरक्षण और उनकी बेहतर व्यवस्था को सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में बड़ी संख्या में गोशालाएं संचालित हैं और शासन द्वारा उन्हें अनुदान भी दिया जाता है, इसके बावजूद बड़ी संख्या में गोवंश सड़कों पर बैठा दिखाई देता है। इससे जहां यातायात प्रभावित होता है, वहीं गोवंश के दुर्घटनाग्रस्त होने का खतरा भी बना रहता है। उन्होंने गोवंश को गोशालाओं में उचित स्थान उपलब्ध कराने की मांग की।बैठक में गोचर भूमि पर किए गए अतिक्रमण को हटाकर उसे गोवंश के लिए मुक्त कराने की मांग भी प्रमुखता से उठाई गई। गौ सेवकों ने कहा कि गोशालाओं की नियमित निगरानी आवश्यक है। इसके लिए शासन-प्रशासन, संबंधित विभागों और गौ सेवा संगठनों के प्रतिनिधियों को शामिल कर निगरानी समिति गठित की जानी चाहिए।बैठक में निर्णय लिया गया कि पहले संबंधित अधिकारियों को आवेदन एवं निवेदन के माध्यम से समस्याओं से अवगत कराया जाएगा। इसके बाद भी 15-20 दिनों में सुधार नहीं होने पर प्रदेशभर में आंदोलन किया जाएगा। संगठन द्वारा नीमच से गोशालाओं के निरीक्षण की शुरुआत कर जिले और आसपास के क्षेत्रों की गोशालाओं का दौरा किया जाएगा।निरीक्षण के दौरान कमियां मिलने पर संबंधित जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवेदन दिया जाएगा और आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन भी किया जाएगा।गौ सेवकों ने गोमाता को राष्ट्रीय माता का दर्जा देने, गोचर भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराने तथा शहरों में घूम रहे गोवंश को गोशालाओं में सुरक्षित स्थान उपलब्ध कराने की मांग रखी।साथ ही नंदी महाराज के संरक्षण और गोशालाओं में उनकी उचित व्यवस्था को लेकर जनजागृति अभियान चलाने पर भी जोर दिया गया।वही गोशालाओं के लिए निगरानी समिति बनाई जाने की मांग की जिसमें जिला प्रशासन के अधिकारी गौ सेवा दल के सदस्य और गौशालाओ के पदाधिकारी को सम्मिलित करने की बात कही।