नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। रक्षाबंधन के पावन पर्व पर कनावटी स्थित जिला जेल में शुक्रवार को भाई-बहन के अटूट प्रेम और भावनाओं का ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। ऊंची जेल की दीवारों और लोहे की सलाखों के बीच जब बहनों ने अपने बंदी भाइयों की कलाइयों पर राखी बांधी तो भाई-बहन की आंखें छलक उठीं। किसी बहन ने भाई की जल्द रिहाई की दुआ की तो किसी ने उसके बेहतर और नई जिंदगी की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों से मिले स्नेह के बीच आगे बेहतर जीवन जीने और गलतियों से सीख लेकर नई शुरुआत करने का संकल्प लिया।
रक्षाबंधन पर करीब 350 बंदियों से मुलाकात के लिए लगभग 1000 महिलाओं के पहुंचने का अनुमान है। सुबह से ही जिला जेल के बाहर बहनों की लंबी कतारें दिखाई देने लगी थीं। हाथों में राखी, मिठाई और श्रीफल लिए महिलाएं अपने भाइयों से मिलने पहुंचीं। मुलाकात के दौरान बहनों ने भाइयों की कलाई पर राखी बांधी,तिलक लगाया और मिठाई खिलाकर रक्षाबंधन की शुभकामनाएं दीं। लंबे समय बाद सामने आए भाई-बहन कई बार खुद को भावनाओं पर काबू नहीं रख सके और एक-दूसरे से गले मिलकर रो पड़े।
*किसी ने मांगी रिहाई की दुआ,किसी ने मांगा बेहतर भविष्य*
जेल में बंद भाइयों के लिए रक्षाबंधन का यह पर्व भावनाओं से भरा रहा। बहनों ने राखी बांधते हुए भाइयों के जल्द घर लौटने की कामना की। कई बहनों ने भाइयों को हिम्मत देते हुए कहा कि बीते समय को पीछे छोड़कर आगे का जीवन बेहतर बनाने की कोशिश करें। भाइयों ने भी बहनों को भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में बेहतर इंसान बनने और परिवार की उम्मीदों पर खरा उतरने का प्रयास करेंगे।
*मुलाकात के लिए किए विशेष इंतजाम*
जिला जेल के उप अधीक्षक नारायण सिंह राणा ने बताया कि वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार रक्षाबंधन पर्व को देखते हुए बंदियों और उनकी बहनों की सुगम एवं व्यवस्थित मुलाकात के लिए विशेष व्यवस्थाएं की गईं। सुरक्षा व्यवस्था के साथ महिलाओं की सुविधा और भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। जेल परिसर में मुलाकात के दौरान किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसका भी विशेष ध्यान रखा गया।
*जेल कैंटीन में राखी, मिठाई और श्रीफल की व्यवस्था*
बाहर से आने वाली बहनों को सुविधा देने के लिए जेल परिसर की कैंटीन में राखी, मिठाई और श्रीफल की व्यवस्था भी की गई। इससे महिलाओं को बाहर से सामान लाने की परेशानी नहीं हुई। व्यवस्थाओं को लेकर महिलाएं संतुष्ट नजर आईं।रक्षाबंधन के इस भावुक अवसर पर एक बार फिर साबित हुआ कि रिश्तों की भावनाओं को न तो जेल की ऊंची दीवारें रोक सकती हैं और न ही सलाखें। भाई की कलाई पर बंधी राखी की छोटी-सी डोर ने कुछ पलों के लिए जेल की कठोर दुनिया को भी ममता, स्नेह और अपनत्व से भर दिया। सलाखों के बीच बहनों का प्यार पहुंचा तो कई आंखें नम हो गईं और भाई-बहन के रिश्ते की गर्माहट एक बार फिर महसूस हुई।