नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को नीमच में आदिवासी संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकजुटता का भव्य प्रदर्शन देखने को मिला। सर्व आदिवासी समाज की ओर से शबरी आश्रम से विशाल रैली निकाली गई। रैली में बड़ी संख्या में युवक-युवतियां और समाजजन पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा, हाथों में प्रतीकात्मक तीर-कमान और पारंपरिक वाद्ययंत्रों के साथ शामिल हुए।लोकगीतों और आदिवासी लोकनृत्य की प्रस्तुतियों ने रैली को विशेष आकर्षण दिया। ‘जय जोहार’ और ‘जय जोहार का नारा है, भारत देश हमारा है’ जैसे नारों से शहर का वातावरण गूंज उठा। रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए पुरानी कृषि उपज मंडी पहुंची, जहां आमसभा, समाजजनों का सम्मान, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों सहित विभिन्न गतिविधियों के साथ आयोजन का समापन हुआ।

*पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए समाजजन*

विश्व आदिवासी दिवस के आयोजन में आदिवासी समाज की समृद्ध संस्कृति और परंपराओं की जीवंत झलक देखने को मिली।रैली में युवक-युवतियां एवं समाजजन पारंपरिक वेशभूषा में सजे नजर आए। कई युवाओं के हाथों में प्रतीकात्मक तीर-कमान थे, वहीं पारंपरिक वाद्ययंत्रों की धुन पर समाजजन कदमताल करते हुए आगे बढ़े। महिलाओं और युवतियों ने भी पारंपरिक परिधान में उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

*लोकनृत्य और संगीत ने बांधा समां*

रैली के दौरान आदिवासी लोकगीतों और पारंपरिक संगीत की धुनों पर समाजजनों ने लोकनृत्य की प्रस्तुतियां दीं। नृत्य और संगीत के माध्यम से आदिवासी समाज की सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं को प्रदर्शित किया गया। रैली जिस मार्ग से गुजरी, वहां लोगों ने आदिवासी संस्कृति के इस रंगारंग स्वरूप को उत्सुकता से देखा।
रैली की शुरुआत शबरी आश्रम से हुई। यहां से सर्व आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में एकत्रित होकर रैली के रूप में रवाना हुए। रैली शोरूम चौराहा, फव्वारा चौक सहित शहर के प्रमुख मार्गों से होकर आगे बढ़ी। पूरे मार्ग में समाजजनों द्वारा जय जोहार के नारे लगाए गए। रैली में युवाओं की बड़ी भागीदारी रही।
रैली पुरानी कृषि उपज मंडी पहुंचने के बाद आमसभा में परिवर्तित हो गई। यहां समाज के पदाधिकारियों एवं अतिथियों ने विश्व आदिवासी दिवस के महत्व, आदिवासी समाज की संस्कृति, अधिकारों, शिक्षा और सामाजिक एकता पर विचार व्यक्त किए। इस अवसर पर समाज की विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वाले लोगों का सम्मान भी किया गया। इसके साथ ही सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और अन्य गतिविधियां आयोजित की गईं।

एकता और सांस्कृतिक पहचान का संदेश

आयोजन समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की गौरवशाली परंपराओं, संस्कृति और पहचान को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का दिन है। रैली के माध्यम से समाज ने अपनी पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, संगीत और रीति-रिवाजों को प्रदर्शित करते हुए सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और जागरूकता का संदेश दिया। बड़ी संख्या में समाजजनों की मौजूदगी ने आदिवासी समाज की एकजुटता और अपनी सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव को प्रभावी ढंग से प्रदर्शित किया।चाहें तो इसे मैं और ज्यादा दमदार दैनिक अखबार की फ्रंट-पेज शैली में 500–600 शब्दों में भी तैयार कर सकता हूं।