नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। जिला अस्पताल में 26 जुलाई को 10 वर्षीय बालिका के साथ छेड़छाड़ की घटना का सीसीटीवी फुटेज 30 जुलाई को सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली कटघरे में आ गई है। बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधक को आवेदन सौंपकर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और दोषी के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि जब अस्पताल में पर्याप्त सुरक्षा गार्ड, सीसीटीवी और स्टाफ मौजूद हैं, तब प्रतिबंधित वार्डों में बाहरी लोगों का प्रवेश कैसे हो रहा है? सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि अस्पताल प्रबंधन ने अब तक ऐसी घटनाओं की रोकथाम के लिए कोई स्पष्ट प्रतिबंधात्मक आदेश या सख्त व्यवस्था क्यों लागू नहीं की?

*सीसीटीवी फुटेज से खुली सुरक्षा व्यवस्था की पोल, अस्पताल प्रशासन पर उठे सवाल*

जिला अस्पताल में 10 वर्षीय बालिका के साथ  छेड़छाड़ की घटना ने अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। घटना 26 जुलाई की बताई जा रही है, जबकि इसका सीसीटीवी फुटेज 30 जुलाई को सामने आया। पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधक को लिखित आवेदन देकर दोषी के खिलाफ कार्रवाई, सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने की मांग की है।मिली जानकारी के अनुसार, बालिका अपनी खून की कमी से पीड़ित मां के साथ महिला वार्ड में मौजूद थी। आरोप है कि एक युवक वार्ड में दो बार पहुंचा और बालिका के साथ अभद्र व्यवहार किया। दूसरी बार बालिका ने परिजनों को घटना की जानकारी दी। मामला अस्पताल के सीसीटीवी कैमरों में भी कैद होने की बात सामने आई है।

*केवल एक घटना नहीं, सुरक्षा व्यवस्था पर कई सवाल*

यह पहला मामला नहीं है जब जिला अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में आई हो। अस्पताल परिसर में लंबे समय से कई ऐसी गतिविधियां खुलेआम संचालित होने के आरोप लगते रहे हैं, जिन पर प्रशासन प्रभावी रोक लगाने में विफल रहा है।बताया जाता है कि विभिन्न निजी संस्थाएं बिना स्पष्ट अनुमति महिला प्रसूति वार्ड तक पहुंचकर अपने पोस्टर-बैनर का प्रचार करती रही हैं। जिन वार्डों में पुरुषों का प्रवेश प्रतिबंधित है, वहां भी कई बार पुरुषों के प्रवेश और मोबाइल से फोटो एवं वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की शिकायतें सामने आती रही हैं।
इसके अलावा अस्पताल परिसर में तांत्रिक गतिविधियां होने की भी शिकायतें समय-समय पर उठती रही हैं। वहीं शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) के बाहर दो महिलाओं द्वारा कपड़ों की दुकान लगाकर कब्जा किए जाने तथा आए दिन विवाद की स्थिति बनने के आरोप भी लगते रहे हैं। पूर्व में मोबाइल चोरी जैसी घटनाएं भी अस्पताल परिसर में हो चुकी हैं।

*प्रतिबंधात्मक आदेशों का अभाव बना चिंता का विषय*

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब भी इन मुद्दों को लेकर अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा की जाती है तो केवल आश्वासन दिया जाता है कि संबंधित लोगों को समझा दिया जाएगा। लेकिन अब तक अस्पताल परिसर में अनधिकृत प्रवेश, प्रचार-प्रसार, फोटोग्राफी, वीडियो रिकॉर्डिंग अथवा अन्य अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए कोई स्पष्ट प्रतिबंधात्मक आदेश सार्वजनिक रूप से जारी नहीं किए गए हैं।

*यह है नियम*

सरकारी जिला अस्पतालों में सामान्यतः महिला वार्ड, प्रसूति वार्ड और नवजात शिशु वार्ड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अनाधिकृत व्यक्तियों का प्रवेश प्रतिबंधित रखा जाता है। अस्पताल प्रबंधन की जिम्मेदारी होती है कि—संवेदनशील वार्डों में केवल अधिकृत व्यक्ति ही प्रवेश करें।
विजिटर पास एवं निर्धारित समय का पालन कराया जाए,सीसीटीवी और सुरक्षा गार्डों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जाए,बिना अनुमति प्रचार-प्रसार, पोस्टर-बैनर, फोटोग्राफी एवं वीडियो रिकॉर्डिंग पर रोक लगाई जाए,मरीजों और परिजनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए  प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किए जाएं,किसी भी सुरक्षा चूक या शिकायत पर तत्काल जांच एवं वैधानिक कार्रवाई की जाए।

बताया जा रहा है कि पीड़ित परिवार ने अस्पताल प्रबंधन को आवेदन देकर घटना से अवगत कराया था जिसके बाद सीसीटीवी खंगाले गए और घटना सामने आई।

इस मामले में जिला अस्पताल के सिविल सर्जन डॉक्टर महेंद्र पाटील का कहना है कि अस्पताल परिसर में सुरक्षा को लेकर गार्ड तैनात किए गए है सीसिटीवी कैमरों से निगरानी रखी जा रही है,कैमरे कैद युवक को पकड़ा भी गया था, पीड़ित परिवार को उसकी शिकायत थाने पर करनी चाहिए।

इस मामले में कैंट थाना प्रभारी सौरभ शर्मा ने बताया कि अभी तक थाने पर किसी भी प्रकार का आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है यदि शिकायत दर्ज होती है तो कार्रवाई की जाएगी