नीमच। महेंद्र उपाध्याय। कभी अंग्रेजों की प्रमुख छावनी रहे नीमच की ऐतिहासिक पहचान पर चोरों ने ऐसा हाथ साफ किया कि जिले की धरोहर मानी जाने वाली पुरानी कचहरी परिसर से सदियों पुरानी दो ऐतिहासिक तोपों में से एक रहस्यमय तरीके से गायब हो गई। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इतनी भारी-भरकम धातु की तोप चोरी हो गई और जिला प्रशासन, पुलिस तथा संबंधित विभागों को इसकी भनक तक नहीं लगी। घटना के करीब दो वर्ष बीतने के बाद भी न तो तोप बरामद हुई और न ही किसी जिम्मेदार की जवाबदेही तय हो सकी। अब इस मामले को लेकर जागरूक नागरिक अमरदीप उपाध्याय ने दोबारा कानूनी नोटिस जारी कर प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है।

नीमच शहर की ऐतिहासिक धरोहर पुरानी कचहरी अंग्रेजों के शासनकाल की महत्वपूर्ण इमारतों में गिनी जाती है। इसी परिसर के मुख्य प्रवेश द्वार पर वर्षों से विभिन्न धातुओं से निर्मित दो ऐतिहासिक तोपें स्थापित थीं, जो शहर की विरासत और सैन्य इतिहास की पहचान मानी जाती थीं। लेकिन वर्ष 2024 में इनमें से एक तोप रहस्यमय परिस्थितियों में चोरी हो गई। हैरानी की बात यह रही कि इतनी बड़ी ऐतिहासिक धरोहर गायब होने के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई।जागरूक नागरिक अमरदीप उपाध्याय ने बताया कि उन्होंने इस मामले में सबसे पहले 3 सितम्बर 2024 को जिला कलेक्टर को लिखित शिकायत देकर चोरी हुई तोप की बरामदगी, दोषियों की गिरफ्तारी तथा ऐतिहासिक धरोहरों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की थी। शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया था कि इससे पहले एक समय विधायक दिलीप सिंह परिहार द्वारा दोनों तोपों को कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षित रखने का प्रयास किया गया था,लेकिन बाद में उन्हें पुनः पुरानी कचहरी परिसर में स्थापित कर दिया गया। इसके बावजूद सुरक्षा में लापरवाही के चलते एक तोप चोरी हो गई।अमरदीप उपाध्याय का कहना है कि शिकायत के बाद भी न तो जांच की स्थिति सार्वजनिक की गई और न ही चोरी हुई तोप की बरामदगी को लेकर कोई जानकारी सामने आई। ऐसे में उन्होंने 2 मार्च 2026 को जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, संस्कृति विभाग, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तथा अन्य संबंधित अधिकारियों को प्री-लिटिगेशन लीगल नोटिस भेजते हुए निष्पक्ष जांच,प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की मांग की है।
नोटिस में कहा गया है कि यदि संतोषजनक कार्रवाई नहीं हुई तो उच्च न्यायालय में रिट याचिका अथवा जनहित याचिका दायर कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी मांग की है कि चोरी की जांच की वर्तमान स्थिति लिखित रूप से सार्वजनिक की जाए, आवश्यक होने पर स्वतंत्र उच्चस्तरीय जांच कराई जाए तथा भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पुरानी कचहरी सहित जिले की सभी ऐतिहासिक धरोहरों पर प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए।
यह मामला अब केवल एक चोरी का नहीं, बल्कि नीमच की ऐतिहासिक पहचान, प्रशासनिक जवाबदेही और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का बन गया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब अंग्रेजों की छावनी के गौरवशाली इतिहास की पहचान रही इतनी बड़ी धरोहर सुरक्षित नहीं रह सकी, तो जिले की अन्य ऐतिहासिक धरोहरें आखिर कितनी सुरक्षित हैं। अब सभी की निगाहें प्रशासन पर टिकी हैं कि वह इस गंभीर मामले में जवाबदेही तय कर खोई हुई विरासत को वापस लाने की दिशा में क्या कदम उठाता है।इस मामले में एडिशनल एसपी हेमलता अग्रवाल से जब फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि यह मामला आपके द्वारा संज्ञान में लाया गया है इसके अतिरिक्त यदि इस मामले का शिकायती आवेदन हमें प्राप्त होता है तो जांच कर उचित कार्रवाई की जाएगी।