नीमच। महेंद्र उपाध्याय। जावद नगर स्थित प्राचीन गोरखनाथ आश्रम में 17 जुलाई को संत योगी मौज नाथ के साथ हुई मारपीट की घटना को लेकर रविवार को नाथ योगी समाज का आक्रोश खुलकर सामने आया। बड़ी संख्या में संत, महंत एवं समाजजन जावद बस स्टैंड पर एकत्रित हुए और मुख्य मार्ग पर चक्का जाम कर प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने आरोपियों की तत्काल गिरफ्तारी और सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए जमकर नारेबाजी की। घटना के बाद से क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस एवं प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शनकारियों से चर्चा कर स्थिति को शांत कराने का प्रयास किया।गौरतलब है कि 17 जुलाई को जावद नगर के सीएम राइज स्कूल के समीप स्थित प्राचीन गोरखनाथ आश्रम में कब्जे को लेकर विवाद के दौरान आश्रम में निवासरत योगी मौज नाथ उम्र 65 वर्ष के साथ मारपीट की घटना सामने आई थी। घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ,जिसके बाद संत समाज में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया।घायल संत योगी मौज नाथ ने आरोप लगाया था कि मोहन कुमार,गजेंद्र शर्मा एवं उनके साथ आए 10 से 12 लोगों ने आश्रम में जबरन प्रवेश किया। पहले उन्हें बंधक बनाया गया और बाद में लाठी एवं लोहे के पाइप से हमला कर गंभीर रूप से घायल कर दिया। घटना में उनके हाथ और पैर पर गंभीर चोटें आईं। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और उन्हें पहले शासकीय अस्पताल जावद तथा बाद में जिला चिकित्सालय नीमच रेफर किया गया, जहां उनका उपचार जारी है।बाबा योगी मौज नाथ का आरोप है कि गोरखनाथ आश्रम वर्ष 1970 से स्थापित है और उनके गुरु सहित तीन संतों की समाधियां आश्रम परिसर में बनी हुई हैं। वर्ष 1991 में गुरु के निधन के बाद से वे लगातार आश्रम की देखरेख और पूजा-अर्चना कर रहे हैं। उनका कहना है कि आश्रम की भूमि पर कुछ भूमाफियाओं की नजर है और कब्जे की नीयत से लगातार विवाद खड़ा किया जा रहा है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इससे पहले भी आरोपियों ने आश्रम पहुंचकर झोपड़ी, कवेलू और अन्य सामग्री में तोड़फोड़ की थी।इसी घटना के विरोध में रविवार को नाथ योगी समाज के संतों ने जावद बस स्टैंड पर धरना देते हुए चक्का जाम कर दिया। प्रदर्शन के कारण मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित रहा और वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। प्रदर्शन कर रहे संतों का कहना था कि संत समाज पर हमला किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जब तक सभी आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं होती और दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।मौके पर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। प्रशासनिक अधिकारियों ने संतों के प्रतिनिधिमंडल से चर्चा कर निष्पक्ष जांच और विधिसम्मत कार्रवाई का भरोसा दिलाया।