नीमच।महेंद्र उपाध्याय। जिला चिकित्सालय,जिसे आमजन जीवन बचाने और सेवा का सबसे बड़ा केंद्र मानते हैं, इन दिनों अपने मूल उद्देश्य से भटकती व्यवस्थाओं को लेकर सवालों के घेरे में है।अस्पताल के नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) परिसर में बिना किसी अनुमति के दो महिलाओं द्वारा कपड़ों की दुकान लगाए जाने का मामला सामने आया है। गंभीर बात यह है कि शासकीय अस्पताल परिसर में बिना अनुमति अतिक्रमण कर दुकान संचालित की जा रही है, जबकि अस्पताल प्रबंधन की ओर से अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई है।जानकारी के अनुसार,दोनों महिलाएं ग्राहकों को लेकर आए दिन आपस में विवाद करती हैं। इन झगड़ों के दौरान स्थिति कई बार इतनी तनावपूर्ण हो जाती है कि दोनों एक-दूसरे से मारपीट पर उतारू हो जाती हैं। विवाद के दौरान अश्लील एवं अभद्र भाषा का प्रयोग भी खुलेआम किया जाता है। इस पूरे घटनाक्रम के वीडियो सोशल मीडिया पर भी वायरल हो रहे हैं,जिससे अस्पताल की व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि यह विवाद ऐसे स्थान पर हो रहा है, जहां गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशुओं का उपचार किया जाता है। यहां हर समय चिकित्सकों को शांत वातावरण की आवश्यकता होती है, ताकि उपचार प्रभावित न हो।वहीं नवजातों के परिजन पहले से ही मानसिक तनाव में रहते हैं। ऐसे में अस्पताल परिसर में होने वाला शोर-शराबा, विवाद और अभद्रता मरीजों, उनके परिजनों तथा चिकित्सकों के लिए परेशानी का कारण बन रही है।इस पूरे मामले की जानकारी अस्पताल के जिम्मेदार अधिकारियों और स्टाफ को भी है। इतना ही नहीं,दोनों महिलाओं के खिलाफ संबंधित थाने में शिकायत किए जाने की भी बात सामने आई है, लेकिन अब तक न तो पुलिस स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई और न ही अस्पताल प्रशासन ने अतिक्रमण हटाने के लिए प्रभावी कदम उठाए हैं।यह पहला मामला नहीं है जब जिला अस्पताल की व्यवस्थाओं पर सवाल उठे हों। इससे पहले भी जच्चा-बच्चा वार्ड जैसे प्रतिबंधित क्षेत्र में बिना अनुमति एक संस्था द्वारा कार्यक्रम आयोजित कर फोटोग्राफी किए जाने का मामला सामने आया था। उस दौरान पुरुषों की मौजूदगी में प्रसूता महिलाओं और नवजातों के बीच कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे है,जबकि ऐसे वार्डों में अनावश्यक प्रवेश और फोटोग्राफी नियमों के विरुद्ध मानी जाती है।
जिला अस्पताल को लोग "धरम अस्पताल" कहकर संबोधित जरूर करते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि कोई भी व्यक्ति बिना अनुमति शासकीय परिसर में अतिक्रमण कर दुकान लगा ले, आयोजन करे या प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियमों की अनदेखी करते हुए गतिविधियां संचालित करे। अस्पताल एक संवेदनशील सार्वजनिक संस्थान है,जहां अनुशासन, स्वच्छता और सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।
अब आवश्यकता इस बात की है कि जिला कलेक्टर स्वयं इस पूरे मामले की मॉनिटरिंग करें और अस्पताल परिसर में हुए अतिक्रमण, बिना अनुमति संचालित गतिविधियों तथा प्रतिबंधित क्षेत्रों में नियमों के उल्लंघन की निष्पक्ष जांच कराएं ओर संबंधित व्यक्तियों और जिम्मेदारो के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।आखिरकार,जिला अस्पताल का वातावरण ऐसा होना चाहिए जहां मरीज और उनके परिजन उपचार पर भरोसा कर सकें,न कि विवाद, अतिक्रमण और अव्यवस्था का सामना करें।
इस मामले में सिविल सर्जन डॉक्टर महेंद्र पाटील ने बताया कि एसएनसीयू वार्ड परिसर में दो महिलाओं द्वारा बिना परमिशन के कपड़े की दुकान लगाई गई है उनको कई बार हटाने का प्रयास किया गया है और इस मामले की शिकायत थाने पर भी की गई है परंतु महिलाएं बार-बार आकर यहां अतिक्रमण करती हैं और विवाद करती है आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है थाना प्रभारी को अवगत करा कर उचित कार्रवाई की जाएगी।