[video width="568" height="320" mp4="https://sagarmanthannews.in/wp-content/uploads/2026/07/YouCut_20260707_160431100.mp4"][/video] नीमच।महेन्द्र उपाध्याय। मंगलवार को आयोजित जिला स्तरीय जनसुनवाई में रामपुरा के एक पीड़ित परिवार ने न्याय नहीं मिलने से नाराज होकर कलेक्ट्रेट परिसर के बाहर सड़क पर ही धरना दे दिया। परिवार ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि जब तक उन्हें न्याय नहीं मिलेगा,तब तक वे कलेक्टर कार्यालय परिसर से नहीं उठेंगे। काफी देर तक चले घटनाक्रम के बाद पहले तहसीलदार के संदेश पर भी परिवार धरने से नहीं उठा। बाद में एसडीएम और तहसीलदार स्वयं मौके पर पहुंचे तथा मामले के शीघ्र और निष्पक्ष निराकरण का सागर मंथन आश्वासन दिया,जिसके बाद पीड़ित परिवार ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया।पीड़ित परिवार ने कलेक्टर को दिए आवेदन में बताया कि 23 जून 2026 की जनसुनवाई में उन्होंने रामपुरा के सर्वे क्रमांक 422 स्थित शासकीय कुएं, उससे संबंधित शासकीय भूमि तथा पूर्वजों के धार्मिक चबूतरे पर किए गए अवैध कब्जे, अवैध टीनशेड और बाउंड्री निर्माण की शिकायत की थी। उस दौरान कलेक्टर द्वारा तहसीलदार रामपुरा, मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) रामपुरा और थाना रामपुरा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए थे, लेकिन आरोप है कि आज तक उन आदेशों का पालन नहीं हुआ।आवेदन में पीड़ित परिवार ने आरोप लगाया कि प्यारचंद पिता भागीरथ माली, उनके बेटे मुन्नालाल माली तथा दिनेश माली द्वारा शासकीय कुएं, शासकीय भूमि एवं धार्मिक चबूतरे पर अवैध कब्जा कर निर्माण किया गया है।सागर मंथन परिवार का कहना है कि इस संबंध में उन्होंने 17 जून को थाना रामपुरा, 19 जून को नगर परिषद तथा 22 जून को तहसील कार्यालय में भी लिखित शिकायतें दी थीं, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई।पीड़ितों ने आरोप लगाया कि संबंधित विभाग उन्हें लगातार एक-दूसरे के कार्यालयों में भेजते रहे, जिससे उन्हें मानसिक, आर्थिक और शारीरिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि अतिक्रमण के कारण शासकीय कुएं और धार्मिक चबूतरे तक जाने का रास्ता भी बाधित हो गया है। इतना ही नहीं, उनकी कृषि भूमि की सिंचाई भी प्रभावित हो रही है, जिससे फसलें सूखने लगी हैं और आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है।आवेदन में यह भी उल्लेख किया गया कि पूर्व में आरोपियों द्वारा परिवार की महिलाओं के साथ अभद्र व्यवहार एवं मारपीट की घटनाएं भी हो चुकी हैं, जिनके फोटो और वीडियो संबंधित अधिकारियों को उपलब्ध कराए गए थे।इसके बावजूद कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित परिवार में भय और असुरक्षा का माहौल बना हुआ है। परिवार ने आशंका जताई कि यदि समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कोई गंभीर विवाद या अप्रिय घटना भी हो सकती है।