
नीमच। महेन्द्र उपाध्याय। जिला चिकित्सालय में अव्यवस्थाओं और लापरवाही का एक गंभीर मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रबंधन और नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल परिसर में लगे वाटर कूलर, जिनसे स्टाफ और मरीज पानी पीते हैं,उनकी हालत बेहद खराब पाई गई है। एक वाटर कूलर के खराब होने पर जब उसका ढक्कन हटाकर देखा गया, तो अंदर गंदगी और कचरे का अंबार मिला। यह स्थिति न केवल लापरवाही को दर्शाती है, बल्कि मरीजों और कर्मचारियों की सेहत के साथ सीधा खिलवाड़ भी है।
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इतना ही नहीं, नगर पालिका द्वारा विधायक निधि से उपलब्ध कराया गया वाटर प्यूरिफायर एवं कूलिंग वाटर टैंकर भी केवल शोपीस बनकर रह गया है। अस्पताल परिसर में खड़ा यह टैंकर लंबे समय से बिना उपयोग के पड़ा है। न तो इसकी नियमित सफाई की जा रही है और न ही इसमें पानी भरा जा रहा है, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को पीने के पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।वर्तमान में भीषण गर्मी का दौर चल रहा है, ऐसे में पानी जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव स्थिति को और गंभीर बना रहा है। अस्पताल के बाहर नगर पालिका द्वारा ‘जल गंगा संवर्धन अभियान’ के तहत दो पानी की नांद लगाई गई थीं, लेकिन इन्हें लगाने के दिन के बाद से अब तक दोबारा नहीं भरा गया। नतीजा, यह नांद भी केवल औपचारिकता बनकर रह गई हैं।[/caption]

स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि अस्पताल में दानदाताओं द्वारा लगाए गए वाटर कूलरों की भी उचित देखरेख नहीं की जा रही है। साफ-सफाई और मेंटेनेंस की कमी के चलते इनका उपयोग करना भी जोखिम भरा हो गया है।ऐसे में सवाल उठता है कि आखिर अस्पताल प्रबंधन और नगर पालिका इस गंभीर समस्या को लेकर क्यों उदासीन हैं। नागरिकों ने संबंधित अधिकारियों से जल्द कार्रवाई कर व्यवस्था में सुधार की मांग की है, ताकि मरीजों को स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल उपलब्ध हो सके।