नीमच। महेन्द्र उपाध्याय।अफीम नीति 2026-27 जारी होने के बाद अब नीमच-मंदसौर सहित मालवा-मेवाड़ अंचल के अफीम उत्पादक किसानों की निगाहें पात्रता सूची और पट्टा वितरण प्रक्रिया पर टिक गई हैं। लंबे इंतजार के बाद नीति सामने आने से किसानों को बुवाई की तैयारी आगे बढ़ाने का रास्ता मिला है। वहीं, मार्फिन औसत और आगामी वर्ष के लिए निर्धारित उत्पादन मानकों ने किसानों के सामने नई चुनौती भी खड़ी कर दी है।
उप नारकोटिक्स आयुक्त (डीएनसी) निखिल गांधी ने नीति और किसानों की पात्रता को लेकर जानकारी देते हुए बताया कि इस बार करीब 35 हजार किसानों को लुनाई-चिराई पद्धति तथा लगभग 30 हजार किसानों को सीपीएस पद्धति के तहत पट्टे मिलने की संभावना है। उनके अनुसार, पिछले वर्षों की तुलना में करीब 10 हजार नए किसान भी पात्रता के दायरे में आ सकते हैं। पात्रता सूची रविवार या सोमवार शाम तक जारी होने की संभावना है, जबकि आगामी दो दिनों में पट्टे जारी करने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।

* 4.4 किलो मार्फिन औसत पर लुनाई-चिराई की पात्रता*

नई नीति में फसल वर्ष 2025-26 के दौरान अफीम उत्पादन करने वाले किसानों की मार्फिन उपज को पात्रता का प्रमुख आधार बनाया गया है। निर्धारित शर्तों के अनुसार, प्रति हेक्टेयर औसतन 4.4 किलोग्राम या उससे अधिक मार्फिन उपज हासिल करने वाले किसान लुनाई-चिराई पद्धति के लाइसेंस के लिए पात्र हो सकते हैं। हालांकि, अंतिम पात्रता संबंधित अधिसूचना में दी गई अन्य शर्तों और विभागीय रिकॉर्ड के आधार पर तय होगी।डीएनसी निखिल गांधी के अनुसार, मध्य प्रदेश के अधिकांश किसान 5.5 किलोग्राम से अधिक मार्फिन स्तर की उपज देते आए हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022-23 में यूपीएस नीति पहली बार लागू हुई थी और मौजूदा नीति भी निर्धारित पात्रता व्यवस्था को ध्यान में रखकर बनाई गई है।

*कम मार्फिन औसत वाले किसानों के लिए सीपीएस का विकल्प*

नीति में लुनाई-चिराई और सीपीएस पद्धति के लिए अलग-अलग प्रावधान किए गए हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, 3 से 4.4 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर के बीच मार्फिन औसत वाले कुछ किसानों को निर्धारित शर्तों के अधीन लुनाई-चिराई के स्थान पर सीपीएस पद्धति का लाइसेंस मिल सकता है। वहीं, 3 किलोग्राम से कम औसत वाले किसानों की पात्रता पर भी नियमों के अनुसार निर्णय होगा।

सीपीएस यानी *कंसंट्रेटेड पॉपी स्ट्रॉ* पद्धति में पारंपरिक तरीके से अफीम का चीरा लगाकर गोंद एकत्र करने के बजाय पोस्त के भूसे से संबंधित उत्पादन व्यवस्था अपनाई जाती है। इस पद्धति में भी लाइसेंस, उपज और अन्य शर्तों का पालन अनिवार्य है।

*अगले साल 5.9 किलो मार्फिन का मानक, किसानों को अभी से देना होगा ध्यान*

नई नीति में आगामी फसल वर्ष 2027-28 के लिए भी महत्वपूर्ण प्रावधान किया गया है। इसके अनुसार, वर्ष 2026-27 में प्रति हेक्टेयर कम से कम 5.9 किलोग्राम मार्फिन औसत प्राप्त करना अगले वर्ष लुनाई-चिराई पद्धति के लाइसेंस की पात्रता के लिए आवश्यक होगा। यानी मौजूदा 4.4 किलोग्राम के मानक की तुलना में आगामी वर्ष के लिए निर्धारित सीमा 1.5 किलोग्राम अधिक है।इस प्रावधान के चलते किसानों को केवल मौजूदा पट्टा प्राप्त करने पर ही नहीं, बल्कि आगामी फसल की उपज और गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। हालांकि, अगले वर्ष की पात्रता भी उस समय लागू होने वाली नीति और अन्य शर्तों के अधीन रहेगी।

*पात्रता सूची में नाम नहीं आए तो क्या करें?*

डीएनसी ने बताया कि यदि किसी किसान का नाम पात्रता सूची में नहीं आता है, तो वह संबंधित दस्तावेजों के साथ जिला अफीम अधिकारी अथवा उप नारकोटिक्स आयुक्त कार्यालय में संपर्क कर सकता है। किसानों को अपनी पिछली उपज, मार्फिन औसत, पुराने लाइसेंस और अन्य जरूरी अभिलेखों का मिलान कर लेना चाहिए, ताकि रिकॉर्ड में किसी प्रकार की त्रुटि होने पर समय रहते संबंधित अधिकारियों के सामने मामला रखा जा सके।उन्होंने किसानों से अपील की है कि वे लाइसेंस या पट्टा दिलाने के नाम पर दलालों के झांसे में न आएं। पात्रता और लाइसेंस वितरण की प्रक्रिया विभागीय नियमों के अनुसार ही होगी। किसान किसी भी दावे पर भरोसा करने से पहले केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की आधिकारिक वेबसाइट **cbn.gov.in** पर उपलब्ध अधिसूचना और संबंधित कार्यालय से जानकारी प्राप्त करें।

*पांच साल के पट्टे से उम्मीद, लेकिन नियमों का पालन जरूरी*

अफीम उत्पादक किसानों के लिए नई नीति में पात्रता विस्तार की संभावना राहत देने वाली है, लेकिन मार्फिन औसत और आगामी वर्ष के बढ़े हुए मानक को देखते हुए खेती की प्रक्रिया पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो गई है। करीब 65 हजार किसानों को पट्टे मिलने की जानकारी के बीच अब सबसे अहम सवाल पात्रता सूची में नाम, खेती की श्रेणी और लाइसेंस जारी होने की तारीख को लेकर है।डीएनसी के अनुसार, आगामी दो दिनों में पट्टा वितरण की प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है। ऐसे में किसानों को आधिकारिक सूची जारी होने का इंतजार करते हुए अपने दस्तावेज तैयार रखने चाहिए और केवल विभाग की ओर से घोषित निर्देशों के आधार पर ही आगे की कार्रवाई करनी चाहिए।